यह ब्लॉग खोजें

रविवार, 16 जनवरी 2011

गांधीवाद सन्दर्भ वैश्वीकरण

गांधीवाद सन्दर्भ वैश्वीकरण
प्रख्यात कथाकार श्री गिरिराज किशोर ने बांदा में देवेन्द्र नाथ खरे स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए कहा अमेरिका वैश्वीकरण का जनक है. इसके मूल में एक देश का दूसरे देश के प्रति लालच है.अमेरिका सोचता है हम आप को अमुक वस्तु बेचते है तो आप हमें क्या देंगे, अमेरिका के पास इतने आग्नेय अस्त्र -शस्त्र है की वह दुनिया को दस बार नस्ट कर सकता है.हम लोग खेती पर निर्भर है अमेरिका यंत्रीकृत है.अमेरिका के लालच के कई देश शिकार है. हम अपने बच्चो को बड़े गर्व एंव खुश होकर अमेरिका भेज रहे है.हम अमेरिका की चाल को नहीं समझ पाते है.विश्व की आर्थिक मंदी का जनक अमेरिका ही है.मंदी के दौरान कुछ भारतीय परिवारों ने अमेरिका में त्रासदी झेली है वह अकल्पनीय है.
भारत में बुध हुए,गाँधी हुए,जैन हुए हम भारतीय अहिंसा को जितनी गहरे से समझ सकते है अन्य कोई नहीं. गाँधीजी भगवत गीता की बात करते है रामायण की बात करते है. बकरी का दूध पीते थे.जमीन में बैठकर बड़ी बड़ी बैठके कर लेते थे यह सब आमजन से जुड़ने की बात है.आर्थिक मंदी का प्रतिकार गाँधी की देन है.आर्थिक मंदी से मुकाबला करने की हिम्मत गाँधी ने बहुत पहले से दी है. इस्लाम में ब्याज वर्जित है लेकिन हमारे यहाँ का पैटर्न ब्याज पर ही है.विश्व में कई ऐसे बड़े व्यवसाई है जिन्होंने अपनी संपत्ति को ट्रस्ट  में बदल दिया है. यह संपत्ति आम जन के हित में ली जा रही है और ये व्यवसाई गाँधी जीवन दर्शन से प्रभावित है.गाँधी भय मुक्त होने की बात करते थे.भय मनुष्य का बहुत बड़ा शत्रु है.दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला भयमुक्त थे न्याय के लिए उन्होंने एक लम्बी लड़ाई लड़ी.२७ वर्ष तक जेल में रहे अंततः जेल से मुक्त हुए अफ्रीका के रास्ट्रपति हुए. यह सब गाँधी जीवन दर्शन से प्रभावित थे अतः समाज के  लिए हितकर कम किया.गांधीजी को कौन भूल सकता है.गाँधी जीवन से पूरा विश्व प्रभावित है. कई रास्ट्र के लोगो में गाँधी दर्शन के चलते अहिंसात्मक जीवन जीने की सोच पैदा हो रही है.गांधीजी ने हिंद स्वराज में लिखा है की अंग्रेजो यदि तुम्हे हिंदुस्तान में रहना है तो हिंदी बोलो हिंदी में लिखो,यह बात गाँधी ने १९०९ में कही.लेकिन अभी हमरी हिंदी की स्थिति राजभाषा के रूप में क्या है यह तमिलनाडु को को लेकर आप जान सकते है.अंग्रेजी के प्रभुत्व ने क्षेत्रीय  भाषा को किस कदर प्रभावित किया है यह किसी से छिपा नहीं है.गांधीजी उस समय अंग्रेजी के प्रभुत्व से भारतीय भाषाओ की दयनीय स्थिति से काफी दुखी थे.
उन्होंने ने कहा की गांधीजी का अनशन रास्ट्र निर्माण के लिए होता था अब अनसन वेतन वृधि के लिए किया जा रहा है.वैश्वीकरण के कारन हम व्यावसायिक होते जा रहे है देश की स्थित क्या होगी इसका अनुमान लगाना कठिन है.हमारा धंधा मनुष्य से उपर उठ गया है लेकिन जब मनुष्य ही नहीं बचेगा तो इस वैश्विकरण का क्या महत्व है. गांधीजी का चिंतन बहुत बड़ा था डांडी मार्च से ब्रिटिश सरकार हिल गई थी गाँधी आमजनों के सरोकारों को आजादी की लड़ाई में जोड़कर ही इस रास्ट्र को ऐतिहासिक आजादी की नीव रख पाए थे.
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में शहर के गाँधी श्री जमुना प्रसाद ने कहा की   मास्टर साहब का जीवन इस शहर की आने वाली पीढ़ी के लिए एक पाठशाला है हमें गर्व है की वह हमारे बीच रहे. उन्होंने कहा की मै गाँधी की trusteeship  की अवधारणा से सहमत नहीं हूँ.

6 टिप्‍पणियां:

  1. महत्त्वपूर्ण बात रखी आपने. स्वागत.

    gandhivichar

    उत्तर देंहटाएं
  2. हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसका अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । धन्यवाद सहित...
    http://najariya.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    उत्तर देंहटाएं